
माँ :माँ के कदमों तले जन्नत है
माँ अल्लाह का वो अता करदा इनआम है जिसे हम शुमार नहीं कर सकते माँ का पियार हकीकत में वही एक ऐसा पियार है जिस के मोहब्बत में कोई शक नहीं है अगर माँ हमें बचपन में मारती भी है तो उस के अंदर पियार छुपा होता है माँ कि मोहब्बत कोई भी इंसान इंकार नहीं कर सकता कोई भी इंसान किसी तरह का भी चोर डाकू शराबी कुछ भी करे वो फिर भी माँ उसे मोहब्बत कि नज़र से ही देखती है अपनी माँ कि नज़र में कभी वो बुरा नहीं होता ये है माँ कि मोहब्बत कि इंतिहा लेकिन हम माँ को किस नज़र से देखते है वो हम अपने दिल में खुद ही झांक कर देखें हम माँ को किया किया चीजें ला कर देते है कितना आराम पहुंचाते है इस के मुकाबले में अपनी बीवी को लाए के हम ज़ियादा आराम बीवी को पहुंचाते है या माँ को ?
अल्लाह हम सब को माँ का मरतबा पहचानने कि तौफीक अता करे : आमीन